हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि कार्यालय ने इस्लामी गणराज्य ईरान के राष्ट्रपति से संबंधित सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए एक विकृत वीडियो की निंदा करते हुए कहा है कि वीडियो के कुछ हिस्सों को मूल घटना के संदर्भ से हटाकर पेश किया गया, जिससे राष्ट्रपति के व्यवहार के बारे में गलत धारणा पैदा हुई।
बयान में कहा गया कि वास्तविक घटना यह थी कि एक व्यक्ति ने ईरान के राष्ट्रपति को एक पत्र दिया। पत्र लेने के बाद वह उनके हाथ से जमीन पर गिर गया, जिसे उठाने के लिए राष्ट्रपति नीचे झुके। इसलिए उनका झुकना किसी व्यक्ति के सामने सम्मान या आदर प्रकट करने के लिए नहीं था, बल्कि जमीन पर गिरे हुए पत्र को उठाने के लिए था।
वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि कार्यालय ने कहा कि वीडियो के कुछ हिस्सों को काटकर और घटना के पूरे क्रम तथा पृष्ठभूमि को नजरअंदाज करके प्रसारित करने से उसका मूल अर्थ बदल गया और ऐसा प्रभाव पैदा हुआ, जो वास्तविक घटना के अनुरूप नहीं है।
बयान में इस तरह की कार्रवाई को पत्रकारिता की ईमानदारी और नैतिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों के विरुद्ध बताते हुए कहा गया कि आज के दौर में आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से तस्वीरों और वीडियो में बदलाव करना संभव है। इसलिए मीडिया और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि किसी भी सामग्री को प्रसारित करने से पहले उसकी सत्यता, मूल क्रम और पूरी पृष्ठभूमि की जांच करें।
कार्यालय ने अपील की कि अपुष्ट, अधूरी या संदर्भ से हटाकर पेश की गई तस्वीरों और वीडियो के प्रचार-प्रसार से बचा जाए। उसने कहा कि इस तरह की सामग्री से जनता के बीच गलतफहमियां पैदा होती हैं और वास्तविकता विकृत होती है।
बयान में आगे कहा गया है कि इस्लामी गणराज्य ईरान और उसके उच्च अधिकारी सभी धर्मों और उनके अनुयायियों के सम्मान, मानव गरिमा, आपसी सम्मान, विभिन्न धर्मों के बीच संवाद और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर हमेशा जोर देते रहे हैं।
वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि कार्यालय ने भारत की जनता के साथ ईरान के ऐतिहासिक, सभ्यतागत और मैत्रीपूर्ण संबंधों का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि जिम्मेदार मीडिया और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता पूरी सच्चाई और वास्तविक घटना को ध्यान में रखते हुए विकृत या भ्रामक सामग्री को वास्तविकता के रूप में पेश करने से बचेंगे।

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